आज का शब्द: गेह और केदारनाथ अग्रवाल की कविता- आसमान की ओढ़नी ओढ़े

'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- गेह, जिसका अर्थ है- घर, मकान। प्रस्तुत है केदारनाथ अग्रवाल की कविता- आसमान की ओढ़नी ओढ़े 

आसमान की ओढ़नी ओढ़े, 

धानी पहने 

फ़सल घँघरिया, 

राधा बन कर धरती नाची, 

नाचा हँसमुख 

कृषक सँवरिया। 

माती थाप हवा की पड़ती, 

पेड़ों की बज 

रही ढुलकिया, 

जी भर फाग पखेरू गाते, 

ढरकी रस की 

राग-गगरिया! 

मैंने ऐसा दृश्य निहारा, 

मेरी रही न 

मुझे ख़बरिया, 

खेतों के नर्तन-उत्सव में, 

भूला तन-मन 

गेह-डगरिया। 

2024-07-10T00:23:51Z dg43tfdfdgfd