BHAVISHYA MALIKA KATHA: भविष्य मालिका की ये 6 भविष्यवाणियां हो चुकी हैं सच, जगन्नाथ पुरी मंदिर से मिले दुनिया के महाविनाश के संकेत

bhavishya Malika bhavishyavani in hindi: पुरी के जगन्नाथ मंदिर से कुछ ऐसे संकेत मिल चुके हैं, जिससे भविष्य मालिका की भविष्यवाणियां सच होती दिखीं। 16वीं सदी में संत अच्युतानंददास ने 'भविष्य मालिका' नाम की पुस्तक में कलियुग के अंत और दुनिया के महाविनाश की भविष्यवाणियां लिखी थीं। जगन्नाथ मंदिर की ज्यादातर भविष्यवाणियां सच हो चुकी हैं। जिनमें त्रिदेव के वस्त्र जलने से लेकर प्राचीन पेड़ गिरने तक की घटनाएं शामिल हैं। आइए, जानते हैं जगन्नाथ मंदिर से जुड़ीं भविष्य मालिका की भविष्यवाणियां जो सच हो चुकी हैं।

कलियुग के बारे में जब भी बात होती है, तो दुनिया के अंंत जिक्र भी जरूर होता है। स्कंद पुराण, भविष्य पुराण, भागवत पुराण, विष्णु पुराण सहित कई और पुराणों में कलियुग का उल्लेख किया गया है। पुराणों में लिखा गया है कि धरती पर जब कलियुग अपनी चरम सीमा पर होगा, तो दुनिया विनाश की ओर बढ़ेगी और तब भगवान विष्णु के दशवें अवतार कल्कि का जन्म होगा। कल्कि के रूप में जन्म लेकर भगवान विष्णु इस युग का अंत करेंगे और तब नए युग की स्थापना होगी। कलियुग की कई भविष्यवाणियों में 'भविष्य मालिका' की भविष्यवाणियां भी कई बार चर्चा का विषय बन चुकी हैं। 16वीं सदी के संत अच्युतानंददास ने 500 वर्ष पहले कलयुग के अंत के बारे में भविष्य मालिका में लिखी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इनमें से ज्यादातर भविष्यवाणियां जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी हुई है और सच हो चुकी है। ऐसे में अनुमान लगाए जा रहा है कि अब दुनिया का विनाश करीब है।​त्रिदेव के वस्त्र में भी लग गई आग

भविष्य मालिका में जगन्नाथ पुरी से जुड़ी एक और भविष्यवाणी का जिक्र किया गया है। इसके अनुसार मंदिर परिसर में त्रिदेव के ऊपर जो कपड़ा है, उसमें आग लगने की घटना का उल्लेख मिलता है। कुछ साल पहले पहली बार त्रिदेव के वस्त्र में आग लगी थी। इस घटना के बाद कलियुग के अंत के बारे में एक बार फिर से बातें होने लगीं।

​पापनाशक एकादशी के दिन जगन्नाथ मंदिर के झंडे में लगी थी आग

पापनाशक एकादशी के दिन जगन्नाथ पुरी मंदिर में एक अखंड महादीप जलाया गया था लेकिन अचानक तेज हवा चली और झंडा उड़कर दीपक के चला गया गया, जिससे मंदिर के झंडे में आग लग गई। यह घटना 19 मार्च 2020 को हुई थी। झंडे में आग लगने का उल्लेख भी भविष्य मालिका में मिलता है। इस घटना के बाद यह कहा जाने लगा कि यह कलियुग के अंत का संकेत है और दुनिया का महाविनाश भी होने ही वाला है।

​मंदिर के गुबंद पर गिद्ध का बैठना

जगन्नाथ मंदिर के बारे में कहा जाता है कि दूसरे मंदिरों की तरह जगन्नाथ मंंदिर के गुबंद पर कभी कोई पक्षी नहीं बैठता और ना ही इस पर कोई प्लेन, हेलिकॉफ्टर उड़ता है लेकिन जुलाई 2020 के बाद से मंदिर के गुबंद पर गिद्ध चील और बाज को देखा गया था। ये पक्षी मंदिर के गुबंद, स्तंभ और नीलचक्र पर भी बैठे थे। ऐसे में दुनिया के महाविनाश की भविष्यवाणी एक बार फिर से चर्चा में आ गई थी।

​नीलचक्र के झुकने की घटना

भविष्य मालिका के अनुसार जब कलियुग का अंत करीब होगा, तो भगवान जगन्नाथ मंदिर का नीलचक्र यानी सुदर्शनचक्र तूफान से टेड़ा हो जाएगा। मई 2019 में समुद्री तूफान फानी के कारण यह विशालकाय चक्र टेड़ा हो गया था। तब से यह कहा जा रहा है कि दुनिया के महाविनाश का समय आ चुका है। तब से इस नीलचक्र को ठीक करने की कोशिश भी की गई है लेकिन इसका स्वरूप पहले जैसा नहीं हो पाया है।

​जगन्नाथ मंदिर के गुंबद नीचे गिरेंगे

भविष्य मालिका में लिखा गया है कि जब जगन्नाथ पुरी मंदिर के गुंबद से नीचे पत्थर गिरेंगे, तो यह दुनिया के महाविनाश का संकेत होगा। ऐतिहासिक किताबों के अनुसार 1842 से लेकर अब तक लगभग 15 से 16 बार जगन्नाथ पुरी से पत्थर गिरने की घटना हो चुकी है। ऐसे में इस घटना को कलियुग की चरम सीमा और दुनिया के महाविनाश से जोड़कर देखा जाता है।

​प्राचीन बरगद का पेड़ गिरने की घटना

जगन्नाथ पुरी में एक प्राचीन बरगद का पेड़ था। भविष्य मालिका में इस पेड़ के गिरने की भविष्यवाणी की गई थी। ओडिशा में 2019 में फानी तूफान के बाद जगन्नाथ मंदिर का बरगद का पेड़ गिर गया था। इसके बाद कोरोना महामारी फैलनी शुरू हुई थी। भविष्य मालिका में पेड़ के गिरने और महामारी के बीच सम्बध का उल्लेख भी किया गया था। कोरोना महामारी में लाखों लोग मारे गए थे।

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